अपामार्ग (चिरचिरा),भरोंट, Apamarg,Chirchira, sikhri,atjira ke fayde in Hindi

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अपामार्ग को चिरचिटा, लटजीरा, चिरचिरा, सीखरी, चिचड़ा, भरोंट आदि नामों से जाना जाता हैं…।

इस समय सड़क हो या नदी-तालाब किनारे या बंजर भूमि हर कहीं आपको अपामार्ग का पौधा आसानी से दिख जावेगा….हमारे मालवांचल में तो हर गांव कस्बे में यह बड़ी मात्रा में पैदा होता हैं…. पर इसको अपामार्ग के नाम से कोई नही जानता, हर कोई आंधीझाड़ा कहता हैं, जो कहीं न कहीं इसका अपमान ही है क्योंकि आंधीझाड़ा का मतलब  हमारे इधर बेकार की झाड़ी से लगाया जाता हैं….।

अपामार्ग (apamarga plant) को चिरचिटा, लटजीरा, चिरचिरा, चिचड़ा भी बोलते हैं। यह एक बहुत ही साधारण पौधा है। आपने अपने घर के आस-पास, जंगल-झाड़ या अन्य स्थानों पर अपामार्ग का पौधा जरूर देखा होगा, लेकिन शायद इसे नाम से नहीं जानते होंगे।

अपामार्ग की पहचान नहीं होने के कारण प्रायः लोग इसे बेकार ही समझते हैं, लेकिन आपका सोचना सही नहीं है। अपामार्ग (लटजीरा) एक जड़ी-बूटी है, और इसके कई औषधीय गुण हैं। कई रोगों के इलाज में अपामार्ग (चिरचिटा) के इस्तेमाल से फायदे (chirchita plant benefits)  मिलते हैं। दांतों के रोग, घाव, पाचनतंत्र विकार सहित अनेक बीमारियों में अपामार्ग के औषधीय गुण से लाभ मिलता है।

अपामार्ग (लटजीरा) एक जड़ी-बूटी है। बारिश के मौसम की शुरुआत में अपामार्ग का पौधा अंकुरित होने लगता है। ठंड के मौसम में फलता-फूलता है, और गर्मी के मौसम में पूरी तरह बड़ा हो जाता है। इसी मौसम में फल के साथ पौधा (apamarga plant) भी सूख जाता है।

इसके फूल हरी गुलाबी कलियों से युक्त होते हैं। इसके बीज चावल जैसे होते हैं। इन्हें ही अपामार्ग तंडुल कहते हैं। इसके पत्ते बहुत ही छोटे और सफेद रोमों से ढके होते हैं। ये अण्डाकार एवं कुछ नुकीले से होते हैं।

अपामार्ग की मुख्यतः दो प्रजातियां होती हैं, जिनका प्रयोग चिकित्सा में किया जाता है।

सफेद अपामार्ग

लाल अपामार्ग

सफेद और लाल दोनों प्रकार के अपामार्ग की मंजरियां पत्तों के डण्ठलों के बीच से निकलती हैं। ये लंबे, कर्कश, कंटीली-सी होती है। इनमें ही सूक्ष्म और कांटे-युक्त बीज होते हैं। ये बीज हल्के काले रंग के छोटे चावल के दाने जैसे होते हैं। ये स्वाद में कुछ तीखे होते हैं। इसके फूल छोटे, कुछ लाल हरे या बैंगनी रंग के होते हैं। लाल अपामार्ग की डण्डियां और मञ्जरियां कुछ लाल रंग की होती हैं। इसके पत्तों पर लाल-लाल सूक्ष्म दाग होते हैं।

अन्य भाषाओं में अपामार्ग (चिरचिरा) के नाम (Name of Apamarg in Different Languages):

अपामार्ग (apamarga plan) का वानस्पतिक नाम एकायरेन्थिस् एस्पेरा (Achyranthes aspera L., Syn-Achyranthes australis R. Br.), है, और यह एमारेन्थेसी (Amaranthaceae) कुल का है। अपमार्ग के अन्य ये भी नाम हैंः-

 

 

 

 

 

सफेद अपामार्ग के नाम (Names of White Apamarg)

White Apamarg in-

Hindi – चिरचिटा, लटजीरा, चिरचिरा, चिचड़ा

Urdu – चिरचिटा (Chirchita)

English – वाशरमैन्स प्लान्ट (Washerman’s plant), रफ चाफ फ्लॉवर (Rough chaff flower); दी प्रिक्ली-चाफ फ्लॉवर (The prickly-chaff flower)

Sanskrit – अपामार्ग, शिखरी, अधशल्य, मयूरक, मर्कटी, दुर्ग्रहा, किणिही, खरमंजरी, प्रत्यक्फूली

Assamese – अपंग (Apang)

Kannada – उत्तरणी (Uttarani)

Konkani – कान्टमोग्रो (Kantmogro)

Gujarati – अघेड़ो (Aghedo)

Tamil – नायु रुवि (Nayu ruvi)

Telugu – अपामार्गमु (Apamargamu)

Bengali – अपांग (Apang), चिरचिटी (Chirchiti)

Nepali – दतिवन (Dativan)

Punjabi – कुत्री (Kutri), पुठखण्डा (Puthkhanda)

Marathi – अघाड़ा (Aghada)

Malayalam – वनकटलटी (Vankatlati), कटलटी (Katalati)

Arabic – अत्कुमह (Atkumah)

Persian – खरेवाजहुम (Kharevazhum)

लाल अपामार्ग  (Cyathula prostrata (Linn.) Blume) के नाम (Names of of Red Apamarg):

Red Apamarg in –

Hindi – लाल चिरचिटा, लाल-चिचींडा

Sanskrit – रक्तापामार्ग, वृन्तफल, वशिर, मरकटपिप्पली, कपिपिप्पली

English – परपल प्रिंसेस (Purple princess), पाश्चुरवीड (Pastureweed), प्रोस्ट्रेट पाश्चुर वीड (Prostrate pasture weed)

Kannada – उत्तरनी (Uttarani), किरीमुलोइकाडन्तु (Kirrimulloi kaadantu)

Tamil – चिरुकटालाती (Cirukatalati)

Telugu – उत्तरनी (Uttarani)

Malayalam – चेरुकाटालाटी (Cherukatalati)

Marathi – भुइ घड्डा (Bhuighaada)

Apamarg health benefit:

अपामार्ग (लटजीरा) के गुण को आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, और रोगों को ठीक किया जाता है। अगर आप अपामार्ग (चिरचिटा) के फायदे के बारे में नहीं जानते हैं तो यह लेख आपके लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह एक ऐसा पौधा (apamarga plant) है जो हर जगह मिल जाता है।

आप अपामार्ग से खांसी, मूत्र रोग, चर्म रोग सहित अन्य कई बीमारियों का इलाज कर सकते हैं। इसलिए आइए जानते हैं कि अपामार्ग (लटजीरा) के कौन-कौन से फायदे आप ले सकते हैं, या इससे क्या नुकसान हो सकता है

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गुणों की खान “अपामार्ग”:

अपामार्ग एक बहुओषधिय पौधा हैं, जिसका तना,जड़,पत्ते,बीज सभी का औषधीय मूल्य है….

अपामार्ग को अघाडा ,लटजीरा या चिरचिटा आदि नामों से जाना जाता हैं….।

आंधीझाड़ा के पत्ते ऋषिपंचमी ,गणेश पूजा , हरतालिका पूजा,मंगला गौरी पूजा आदि समय काम आते है .शायद पूजा में इस्तेमाल ही इसलिए होता होगा  ताकि हम इनके आयुर्वेदिक रूप को पहचान सके और ज़रुरत के समय इनका सदुपयोग करना ना भूले….।

इसके पत्तों को पीसकर लगाने से फोड़े फुंसी और गांठ तक ठीक हो जाती है …अपामार्ग की जड़ को कमर में धागे से बाँध देने से प्रसव सुख पूर्वक हो जाता है, प्रसव के बाद तुरन्त इसे हटा देना चाहिए….।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ज़हरीले कीड़े काटने पर इसके पत्तों को पीसकर लगा देने से आराम मिलता है …वहीं इसकी ५-१० ग्राम जड़ को पानी के साथ घोलकर लेने से पथरी निकल जाती है . इसके बीज चावल की तरह दीखते है, जिन्हें तंडुल कहते है।

यदि स्वस्थ व्यक्ति इस तंडुल की खीर खा ले तो उसकी भूख-प्यास आदि समाप्त हो जाती है ,पर इसकी खीर उनके लिए वरदान है जो भयंकर मोटापे के बाद भी भूख को नियंत्रित नहीं कर पाते,कालांतर में ऋषि-मुनि इस प्रकार की खीर का उपयोग कर लंबी साधना को पूर्ण करते रहे है।

अपामार्ग एक औषधीय वनस्पति है। इसका वैज्ञानिक नाम ‘अचिरांथिस अस्पेरा’ (ACHYRANTHES ASPERA) है। हिन्दी में इसे ‘चिरचिटा’, ‘लटजीरा’, ‘चिरचिरा ‘ आदि नामों से जाना जाता है।इसे लहचिचरा भी कहा जाता है।

अपामार्ग एक सर्वविदित क्षुपजातीय औषधि है। वर्षा के साथ ही यह अंकुरित होती है, ऋतु के अंत तक बढ़ती है तथा शीत ऋतु में पुष्प फलों से शोभित होती है। ग्रीष्म ऋतु की गर्मी में परिपक्व होकर फलों के साथ ही क्षुप भी शुष्क हो जाता है। इसके पुष्प हरी गुलाबी आभा युक्त तथा बीज चावल सदृश होते हैं, जिन्हें ताण्डूल कहते हैं। झलालड़ शरद ऋतु के अंत में पंचांग (मूल, तना, पत्र, पुष्प, बीज) का संग्रह करके छाया में सुखाकर बन्द पात्रों में रखते हैं। बीज तथा मूल के पौधे के सूखने पर संग्रहीत करते हैं। इन्हें एक वर्ष तक प्रयुक्त किया जा सकता है।

इसे वज्र दन्ती भी कहते हैं। इसकी जड़ से दातून करने से दांतों की जड़ें मजबूत और दाँत मोती की तरह चमकते हैं।

बिच्छू के काटने पर एक कटोरी में ५० ग्राम लाही के तेल को उबालो और उस उबलते हुए तेल में लटजीरा के पौधे को उखाड़ कर और उसका रस निचोड़ कर डालो इससे जो वाष्प निकले उसमें बिच्छूसे कटे हुए भाग की सिकाई करो। शीघ्र लाभ होगा।

सफेद अपामार्ग (चिरचिरा) के फायदे और उपयोग (White Apamarg Benefits and Uses in Hindi)

अपामार्ग (लटजीरा) का औषधीय प्रयोग, प्रयोग की मात्रा और विधियां ये हैं:-

दांत के दर्द में अपामार्ग (चिरचिरा) के फायदे (Chirchita Plant Benefits to Treat Dental Pain in Hindi)

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अपामार्ग से दांत का दर्द ठीक (apamarg ke fayde) होता है।

अपामार्ग के 2-3 पत्तों के रस में रूई को डुबाकर फोया बना लें। इसे दांतों में लगाने से दांत का दर्द ठीक (apamarg ke fayde) होता है।

अपामार्ग की ताजी जड़ से रोजाना दातून करने से दांत के दर्द तो ठीक होते ही हैं, साथ ही दाँतों का हिलना, मसूड़ों की कमजोरी, और मुंह से बदबू आने की परेशानी भी ठीक होती है। इससे दांत अच्छी तरह साफ हो जाते हैं।

चर्म रोग में अपामार्ग (चिरचिरा) के औषधीय गुण से फायदा (Apamarga Plant Uses to Treat Skin Disease in Hindi):

चर्म रोग में अपामार्ग (लटजीरा) से औषधीय गुण से लाभ मिलता है। इसके पत्तों को पीसकर लगाने से फोड़े-फुन्सी आदि चर्म रोग और गांठ के रोग ठीक (apamarg ke fayde) होते हैं।

मुंह के छाले में अपामार्ग (चिरचिरा) के फायदे (Benefits of Apamarg for Mouth Ulcer in Hindi)

मुंह में छाले होने पर अपामार्ग (लटजीरा) के गुण फायदेमंद होते हैं। इसके लिए अपामार्ग के पत्तों का काढ़ा बनाकर गरारा करें। इससे मुंह के छाले की परेशानी ठीक होती है।

अपामार्ग (चिरचिरा) के औषधीय गुण से अत्यधित भूख अधिक लगने की समस्या में लाभ (Apamarg is Beneficial in Appetite Disorder in Hindi):

बहुत अधिक भूख लगने की बीमारी को भस्मक रोग कहते हैं। इसके उपचार के लिए अपामार्ग के बीजों के 3 ग्राम चूर्ण दिन में दो बार लगभग एक सप्ताह तक सेवन करें। इससे अत्यधित भूख लगने की समस्या ठीक होती है।

अपामार्ग के 5-10 ग्राम बीजों को पीसकर खीर बना लें। इसे खाने से अधिक भूख लगने की समस्या ठीक होती है।

अपामार्ग के बीजों को खाने से भी अधिक भूख नहीं लगती है।

अपामार्ग (लटजीरा) के बीजों को कूटकर महीन चूर्ण बना लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाएं। इसे 3-6 ग्राम तक सुबह-शाम जल के साथ सेवन करें। इससे भी लाभ (apamarg ke fayde) होता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आंखों की बीमारी में अपामार्ग (चिरचिरा) के फायदे (Chirchita Plant Benefits to Treat Eye Disease in Hindi):

2 ग्राम अपामार्ग की जड़ (apamarg ki jad) के रस में 2 चम्मच मधु मिलाएं। इसे 2-2 बूंद आंख में डालने से आंखों के रोग ठीक होते हैं।

आईफ्लू, आंखों के दर्द, आंख से पानी बहने, आंखें लाल होने, और रतौंधी आदि में अपामार्ग (apamarg) का इस्तेमाल करना उत्तम परिणाम देता है। अपामार्ग की जड़ को साफ कर लें। इसमें थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर दही के पानी के साथ तांबे के बर्तन में घिसें। इसे काजल की तरह लगाने से आंखों के रोग में लाभ होता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

चोट लगने (कटने-छिलने) पर अपामार्ग (चिरचिटा) के औषधीय गुण से लाभ (Benefits of Apamarg Plant after Injury in Hindi):

अपामार्ग के 2-3 पत्तों को हाथ से मसलकर रस निकाल लें। इस रस को कटने या छिलने वाले स्थान पर लगाएं। इससे खून बहना रुक जाता है।

अपामार्ग की जड़ को तिल के तेल में पकाकर छान लें। इसे कटने या छिलने वाले जगह पर लगाएं। इससे आराम मिलता है।

घाव को सुखाने में अपामार्ग (चिरचिटा) का औषधीय गुण फायदेमंद (Benefits of Apamarga Tree in Healing Chronic Wounds in Hindi):

पुराने घाव हो गया हो तो अपामार्ग के रस के मलहम लगाएं। इससे घाव पकता नहीं है।

अपामार्ग (लटजीरा) की जड़ को तिल के तेल में पकाकर छान लें। इसे घाव पर लगाएं। इससे घाव का दर्द कम हो जाता है। इससे घाव ठीक (chirchita plant benefits) भी हो जाता है।

लगभग 50 ग्राम अपामार्ग के बीज में चौथाई भाग मधु मिला लें। इसे 50 ग्राम घी में अच्छी तरह पका लें। पकाने के बाद ठंडा करके घाव पर लेप करें। इससे घाव तुरंत ठीक हो जाता है।

जड़ का काढ़ा बनाकर घाव को धोने से भी घाव ठीक होता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

खुजली में अपामार्ग (चिरचिरा) का औषधीय गुण लाभदायक (Apamarg Plant Uses in Fighting with Itching in Hindi)

अपामार्ग (लटजीरा) पंचांग से काढ़ा बना लें। इसे जल में मिलाकर स्नान करने पर खुजली ठीक हो जाती है। उपाय करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर मिलें।

सनतंत्र विकार में अपामार्ग (चिरचिटा) के सेवन से लाभ (Benefits of Apamarg Plant to Treats Respiratory Problems in Hindi)

दमा के इलाज के लिए अपामार्ग की जड़ (apamarg ki jad) चमत्कारिक रूप से काम करती है। इसके 8-10 सूखे पत्तों को हुक्के में रखकर पीने से श्वसनतंत्र संबंधित विकारों में लाभ होता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

खांसी में अपामार्ग (चिरचिरा) के सेवन से फायदा (Benefits of Chirchita Plant in Fighting with Cough in Hindi):

लगभग 125 मिग्रा अपामार्ग क्षार में मधु मिलाएं। इसे सुबह और शाम चटाने से बच्चों की श्वास नली और छाती में जमा कफ निकल जाता है। बच्चों की खांसी ठीक होती है।

खांसी बार-बार परेशान करती है, और कफ नहीं निकल रहा है या फिर कफ गाढ़ा हो गया है तो अपामार्ग के सेवन से लाभ मिलता है। इस बीमारी में या न्यूमोनिया होने पर 125-250 मिग्रा अपामार्ग क्षार और 125-250 मिग्रा चीनी को 50 मिली गुनगुने जल में मिला लें। इसे सुबह-शाम सेवन करने से 7 दिन में लाभ हो जाता है।

 

 

 

 

 

 

6 मिली अपामार्ग की जड़ (apamarg ki jad) का चूर्ण बना लें। इसमें 7 काली मिर्च के चूर्ण को मिलाएं। सुबह-शाम ताजे जल के साथ सेवन करने से खांसी में लाभ होता है।

अपामार्ग (लटजीरा) पंचांग का भस्म बनाएं। 500 मिग्रा भस्म में शहद मिलाकर सेवन करने से कुक्कुर खांसी ठीक होती है।

बलगम वाली खासी को ठीक करने के लिए अपामार्ग की जड़ चमत्कारिक रूप से काम करती है। इसके 8-10 सूखे पत्तों को हुक्के में रखकर पीने से खांसी ठीक हो जाती है।

बुखार उतारने के लिए अपामार्ग (लटजीरा) का सेवन फायदेमंद (Benefits of Chirchita Plant in Fighting with Fever in Hindi):

अपामार्ग (लटजीरा) के 10-20 पत्ते लें। इन्हें 5-10 नग काली मिर्च और 5-10 ग्राम लहसुन के साथ पीसकर 5 गोली बना लें। बुखार आने से दो घंटे पहले 1-1 गोली लेने से ठंड लगकर आने वाला बुखार खत्म होता है।

हैजा में अपामार्ग (लटजीरा)  के फायदे (Apamarga Plant Benefits for Cholera Treatment in Hindi):

2-3 ग्राम अपामार्ग की जड़ के चूर्ण को दिन में 2-3 बार ठंडे जल के साथ सेवन करें। इससे हैजा ठीक होता है।

अपामार्ग के 4-5 पत्तों का रस निकालें। इसमें थोड़ा जल व मिश्री मिलाकर प्रयोग करने से भी हैजा में लाभ मिलता है।

पेट के रोग में अपामार्ग (लटजीरा) के सेवन से फायदा (Chirchita Plant Benefits to Treat Abdominal Disease in Hindi):

20 ग्राम अपामार्ग पंचांग को 400 मिली पानी में मिलाकर आग पर पकाएं। जब पानी एक चौथाई रह जाए तब 500 मिग्रा नौसादर चूर्ण और 1 ग्राम काली मिर्च चूर्ण मिला लें। इसे  दिन में 3 बार सेवन करने से पेट के दर्द में राहत मिलती है। इससे पेट की अन्य बीमारी भी ठीक हो जाती है।

2 ग्राम अपामार्ग (चिरचिरा) की जड़ के चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से पेट के दर्द ठीक होते हैं।

अपामार्ग (लटजीरा) के औषधीय गुण से बवासीर का इलाज (Benefits of Apamarg for Hemorrhoids (piles) Treatment in Hindi):

अपामार्ग की 6 पत्तियों और 5 नग काली मिर्च को जल के साथ पीस लें। इसे छानकर सुबह और शाम सेवन करने से बवासीर में लाभ हो जाता है। इससे खून बहना रुक जाता है।

अपामार्ग के बीजों को कूट-छानकर महीन चूर्ण बना लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाएं। इसे 3-6 ग्राम तक सुबह-शाम जल के साथ सेवन करें। इससे बवासीर में फायदा होता है।

10-20 ग्राम अपामार्ग की जड़ के चूर्ण को चावल के धोवन के साथ पीस-छान लें। इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर पिलाने से पित्तज या कफज विकारों के कारण होने वाले खूनी बवासीर की बीमारी में लाभ होता है।

पथरी की बीमारी में फायदेमंद अपामार्ग (लटजीरा) का सेवन (Apamarga Tree Benefits to Cure Kidney Stone in Hindi):

अपामार्ग की 5-10 ग्राम ताजी जड़ को पानी में पीस लें। इसे घोलकर पिलाने से पथरी की बीमारी में बहुत लाभ होता है। यह औषधि किडनी की पथरी को टुकडे-टुकड़े करके शरीर से बाहर निकाल देती है। किडनी में दर्द के लिए यह औषधि बहुत काम करती है।

योनि के दर्द में अपामार्ग (लटजीरा) से लाभ (Apamarg Helps in Relief from Vaginal Pain in Hindi):

अपामार्ग की जड़, पत्ते एवं तना को पीस लें। महिलाएं इसे प्रसव के बाद योनि में लेप के रूप में लगाएं। इससे योनि का दर्द ठीक होता है।

अपामार्ग की जड़ के रस से रूई को भिगोएं। इसे योनि में रखने से योनि के दर्द और मासिक धर्म की रुकावट खत्म होती है।

अपामार्ग (चिरचिरा) और पुनर्नवा की जड़ को जल में घिसकर योनि में लेप करने से प्रसव के कारण होने वाला दर्द ठीक होता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

मासिक धर्म विकार में अपामार्ग (चिचड़ा) से लाभ (Apamarg Plant Benefits for Menstrual Disorder in Hindi):

अपामार्ग (चिरचिरा) पंचांग के रस में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से मासिक धर्म विकार ठीक होता है।

अपामार्ग की जड़ के रस से रूई को भिगोएं। इसे योनि में रखने से मासिक धर्म की रुकावट खत्म होती है।

अपामार्ग के लगभग 10 ग्राम ताजे पत्ते और 5 ग्राम हरी दूब को पीस लें। इसे 60 मिली जल में मिलाकर छान लें। अब इसे गाय के दूध में मिला लें। इसमें ही 20 मिली या इच्छानुसार मिश्री मिलाकर सुबह सात दिन तक पिलाने से  मासिक धर्म के दौरान अधिक खून बहने की परेशानी में लाभ होता है। इसे रोग ठीक होने तक नियमित रूप से करें।

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अपामार्ग पंचांग के रस में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव की समस्या ठीक होती है।

अपामार्ग के पत्ते के रस से सिर पर डालें, पत्ते के रस से योनि पर लेप करें। इससे अधिक रक्तस्राव की समस्या में तुरंत लाभ होता है।

अपामार्ग (चिचड़ा) के औषधीय गुण से गर्भधारण में मदद (Apamarg Helps in Infertility Problem in Hindi):

अनियमित मासिक धर्म या अधिक रक्तस्राव के कारण जो स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं कर पातीं हैं। वे अपामार्ग (चिरचिरा) के औषधीय गुण से लाभ ले सकती हैं। मासिक धर्म खत्म होने के बाद से इस दिव्य बूटी के 10 पत्ते, या इसकी 10 ग्राम जड़ लें। इसे गाय के 125 मिली दूध में पीसकर छान लें। इसका सेवन करें।

ध्यान रखें कि यह उत्तम भूमि में उत्पन्न हुआ हो। इसे 4 दिन तक सुबह, दोपहर और शाम पिलाने से स्त्री गर्भधारण कर लेती है। यह प्रयोग अगर एक बार में सफल न हो तो अधिक से अधिक 3 बार करें।

रसौली के इलाज में अपामार्ग (चिचड़ा) का औषधीय गुण लाभदायक (Benefits of Apamarga Tree to Cure Neoplasm in Hindi):

रसौली के इलाज में अपामार्ग के फायदे होते हैं। अपामार्ग के लगभग 10 ग्राम ताजे पत्ते एवं 5 ग्राम हरी दूब को पीस लें। इसे 60 मिली जल में मिलाकर छान लें। इसे गाय के 20 मिली दूध में मिलाकर पिलाएँ। इसमें इच्छानुसार मिश्री मिलाकर सुबह सात दिन तक पिलाएं। यह प्रयोग रोग ठीक होने तक नियमित रूप से करें। इससे गर्भाशय में गांठ (रसौली) की बीमारी ठीक हो जाती है।

सामान्य प्रसव में अपामार्ग (चिचड़ा) से मदद (Apamarg Plant is Beneficial for Normal Pregnancy in Hindi):

महिलाएं प्रसव के समय भी अपामार्ग (चिरचिरा) का उपयोग कर लाभ ले सकती हैं। पाठा, कलिहारी, अडूसा, अपामार्ग में से किसी एक औषधि की जड़ को पीसकर नाभि और योनि पर लेप करें। इससे प्रसव में आसानी होती है।

प्रसव पीड़ा शुरू होने से पहले अपामार्ग की जड़ को एक धागे में बांधकर कमर पर बांधें। इससे प्रसव आसानी से होता है। ध्यान रखें कि प्रसव होते ही जड़ को हटा लें।

अपामार्ग की जड़, पत्ते एवं शाखाओं को पीस लें। इसे योनि पर लेप करने से सामान्य प्रसव में मदद मिलती है।

अपामार्ग के फूलों का पेस्ट बनाकर सेवन करें। इससे प्रजनन से जुड़े रोगों में लाभ होता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ल्यूकोरिया में अपामार्ग (चिचड़ा) के सेवन से लाभ (Chirchita Plant Benefits to Cure Leucorrhoea in Hindi):

आयुर्वेदिक चिकित्सक ल्यूकोरिया का इलाज करने के लिए अपामार्ग का प्रमुखता से इस्तेमाल करते हैं। अपामार्ग पंचांग के रस में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से ल्यूकोरिया ठीक होता है।

अपामार्ग (चिचड़ा) के औषधीय गुण से चेचक का इलाज (Benefits of Chirchita Plant in Fighting with Chickenpox in Hindi):

हल्दी और अपामार्ग की जड़ को बराबर मात्रा में लेकर महीन पीस लें। इसे हाथों-पैरों के नाखूनों और सिर पर तिलक के रूप में लगा। इससे चेचक नहीं निकलता है। यदि चेचक निकल आया हो तो अपामार्ग (चिरचिरा) की साफ जड़ को पीसकर फुन्सियों पर लगाने से शरीर की जलन शांत हो जाती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

कुष्ठ रोगों में अपामार्ग (चिचड़ा) से लाभ (Chirchita Plant Uses for Leprosy Treatment in Hindi):

अपामार्ग के भस्म को सरसों के तेल में मिलाकर घाव पर लगाएं। इससे कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है।

अपामार्ग के रस में पिसे हुए मूली के बीज मिला लें। इसका लेप करने से कुष्ठ रोग में फायदा होता है।

अपामार्ग (चिरचिरा) के गुण से साइनस का इलाज (Uses of Apamarga Tree for Sinus Treatment in Hindi):

सज्जीक्षार, सेंधा नमक, चित्रक, दंती, भूम्यामलकी की जड़, श्वेतार्क लें। इसके साथ ही अपामार्ग (चिरचिरा) बीज का पेस्ट और गोमूत्र लें। इसे तेल में पकाएँ। इसका लेप करने से साइनस जल्द ठीक हो जाता है।

आधासीसी (माइग्रेन) में फायदेमंद अपामार्ग का इस्तेमाल (Chirchita Plant Uses in Relief from Migraine in Hindi):

अपामार्ग के बीजों के चूर्ण को केवल सूंघने से आधासीसी (माइग्रेन) से आराम मिलता है।

इसको सूंघने से मस्तिष्क के अन्दर जमा हुआ कफ पतला होकर नाक के जरिए निकल जाता है।

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बहरेपन की समस्या में अपामार्ग (चिरचिटा) से लाभ (Apamarga Plant is Beneficial in Deafness Problem in Hindi)

अपामार्ग (चिरचिरा) की साफ धोई हुई की जड़ (apamarg ki jad) का रस निकालें। इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर आग में पका लें। जब तेल केवल रह जाए तब छानकर शीशी में रख लें। इस तेल को गुनगुना करके रोज 2-3 बूंद कान में डालें। इससे बहरेपन की समस्या का इलाज होता है। इससे कान से मवाद बहना रुक जाता है।

अपामार्ग क्षार का घोल और अपामार्ग के पत्ते का पेस्ट बनाएं। इसमें चार गुना तिल के तेल मिलाएं। इसे पकाएं। इस तेल को 2-2 बूंद कान में डालने से बहरेपन का उपचार होता है। इससे कान के आवाज करने की परेशानी ठीक होती है।

जोड़ों के दर्द में फायदेमंद अपामार्ग (चिरचिरा) का उपयोग (Chirchita Plant Benefits for Arthritis in Hindi):

अपामार्ग के 10-12 पत्तों को पीसकर गर्म कर लें। इन्हें जोड़ों पर बांधें। इससे जोड़ों के दर्द से आराम मिलता है।

जोड़ों के दर्द के साथ-साथ फोड़े-फुन्सी या गांठ वाली जगह पर अपामार्ग (चिरचिरा) के पत्ते पीसकर लेप करने से गांठ धीरे-धीरे दूर हो जाता है।

अपामार्ग की जड़ को पीस लें। इसे जोड़ों के दर्द वाले स्थान पर लगाएं। इससे

अपामार्ग की जड़ का काढ़ा बनाकर सेवन करें। इससे कमर दर्द और जोड़ों के दर्द से आराम मिलता है।

वजन कम करने के लिए अपामार्ग (चिरचिटा) का सेवन लाभदायक (Benefits of Chirchita Plant for Weight Loss in Hindi):

भोजन उचित तरह से नहीं पचने के कारण भी वजन बढ़ता है। अपामार्ग में दीपन-पाचन गुण होता है। यह भोजन को पचाने में मदद करता है। इससे शरीर के वजन को कम करने में मदद मिलती है।

अपामार्ग (चिचड़ा) से एनीमिया का इलाज (Benefit of Chirchita Plant in Fighting with Anemia in Hindi):

एनीमिया के इलाज में अपामार्ग (चिरचिरा) का औषधीय गुण फायदेमंद है। आप किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से मिलकर आपामार्ग के प्रयोग की जानकारी जरूर लें। इससे एनीमिया का इलाज किया जा सकता है।

अस्थमा में फायदेमंद अपामार्ग (चिरचिरा) का उपयोग (Apamarga Plant Benefits in Fighting with Asthma in Hindi):

वात एवं कफ दोष असंतुलित होने के कारण अस्था जैसी बीमारी होती है। अपामार्ग में वात और कफ दोषों को संतुलित करने का गुण है। इससे अस्थमा में भी फायदा होता है।

जहरीले कीड़े-मकौड़े के काटने पर अपामार्ग (चिरचिटा) से फायदा (Chirchita Plant is Beneficial in Insect Bite in Hindi):

ततैया, बिच्छू और अन्य जहरीले कीड़ों के काटने वाले स्थान पर अपामार्ग (चिरचिरा) पत्ते के रस लगा दें। इससे जहर उतर जाता है।

अपामार्ग के 8-10 पत्तों को पीसकर लुगदी बना लें। इसे कीड़े के काटने वाले स्थान पर लगाएं। इससे घाव बढ़ता नहीं है।

लाल अपामार्ग (चिरचिरा) के फायदे और उपयोग (Red Apamarg Benefits and Uses in Hindi):

लाल अपामार्ग के निम्न फायदे हैंः-

भूख को बढ़ाने के लिए लाल अपामार्ग (चिरचिटा) का सेवन लाभदायक (Chirchita Plant Benefits in Increasing Appetite in Hindi)

भूख बढ़ाने में लाल अपामार्ग (चिरचिरा) के औषधीय गुण फायदेमंद होते हैं। लाल अपामार्ग की जड़ या पंचांग का काढ़ा बना लें। 10-30 मिली मात्रा में काढ़ा का सेवन करें। इससे भूख बढ़ती है।

लाल अपामार्ग (चिरचिटा) के औषधीय गुण से कब्ज से राहत (Benefits of Apamarga Tree in Fighting with Constipation in Hindi)

1-2 ग्राम अपामार्ग (चिरचिरा) के तने और पत्ते के चूर्ण का सेवन करने से कब्ज की बीमारी ठीक होती है। उपाय करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

मूत्र रोग में फायदेमंद लाल अपामार्ग का सेवन (Chirchita Plant Benefits to Treat Urinary Problems in Hindi):

लाल अपामार्ग (apamarga) के पत्ते से बने 10-30 मिली काढ़ा में चीनी मिला लें। इसका सेवन करने से मूत्र रोग जैसे पेशाब में दर्द होना और पेशाब का रुक-रुक कर आने की परेशानी ठीक होती है।

पेचिश और हैजा में लाल अपामार्ग (चिरचिटा) के सेवन से लाभ (Chirchita Plant Uses to Cure Dysentery and Cholera in Hindi):

लाल अपामार्ग की जड़ या पंचांग का काढ़ा बना लें। इसे 10-30 मिली मात्रा में सेवन करने से पेचिश और हैजा रोग में लाभ होता है।

अपामार्ग (चिरचिटा) के उपयोगी भाग (Useful Parts of Apamarg in Hindi?)

अपामार्ग (चिरचिरा) के इन भागों का उपयोग किया जा सकता हैः-

पत्ते

जड़ (apamarg ki jad)

पंचांग

अपामार्ग (चिरचिटा) का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Apamarg in Hindi?)

आप अपामार्ग (apamarga) का इस्तेमाल इतनी मात्रा में कर सकते हैंः-

रस- 10-20 मिली

जड़ का चूर्ण- 3-6 ग्राम

बीज- 3 ग्राम

क्षार- 1/2-2 ग्राम

अपामार्ग (चिरचिरा) से नुकसान (Apamarg Side Effects in Hindi)

अपामार्ग (चिरचिरा) से यह नुकसान हो सकता हैः-

पाचनतंत्र विकार वाले रोगियों को अपामार्ग (चिरचिरा) का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।

अपामार्ग (चिरचिरा) कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Apamarg Found or Grown in Hindi?)

भारत के सभी जंगली इलाकों, शहरों और गांवों में अपामार्ग (चिरचिरा) (apamarga) पाया जाता है। यह विशेषकर वर्षा-ऋतु में पाया जाता है। कहीं-कहीं अपामार्ग के पौधे (apamarga plant) सालों भर भी मिलते हैं।

क्या आपने एक ऐसी औषधि के बारे में जाना है ? जिसे दोषों का संशोधन करने वाली,भूख बढानेवाली एवं असाध्य रोगों को ठीक करने वाली औषधि के रूप में जाना जाता है और यह औषधि प्रायः सम्पूर्ण भारत में पायी जाती है नाम है “अपामार्ग “  मयूरक ,खरमंजरी,मर्कटी ,शिखरी आदि नामों से प्रचलित यह  वनस्पति समस्त भारत में पायी जाती है

इसके फूल हरे या गुलाबी कलियों से युक्त होते हैं तथा बीजों का आकार चावल क़ी तरह होता है !बाहर से देखने में इसका पौधा 1  से 3 फुट उंचा होता है ,शाखाएं पतली,पत्ते अंडाकार एक से पांच इंच लम्बे होते हैं ,फूल मंजरियों में पत्तों के बीच से निकलते हैं ।

अपामार्ग क़ी क्षार का प्रयोग विभिन्न  आयुर्वेदिक औषधियों में बहुतायात से किया जाता है । अपामार्ग कफ़-वात शामक  तथा कफ़-पित्त का संशोधन करने वाले गुणों से युक्त होता है । इसे रेचन ,दीपन ,पाचन ,कृमिघ्न,रक्तशोधक ,रक्तवर्धक ,शोथहर,डायुरेटिक गुणों से युक्त माना जाता है ।

आइये अब इसके कुछ औषधीय प्रयोगों क़ी चर्चा करें :-

-यदि आप आधे सिर के दर्द से परेशान हों तो इसके बीजों के पाउडर को सूंघने मात्र से दर्द में आराम मिलता है I

-यदि साइनस में सूजन (साईनोसाईटीस) जैसी समस्या से आप परेशान हो रहे हों जिस कारण नाक हमेशा बंद रहती हो और सिर में अक्सर भारीपन बना रहता हो तो इसके चूर्ण को सूंघने मात्र से लाभ मिलता है I

-दांतों के दर्द में इसके पत्तों का स्वरस रूई में लगाकर स्थानिक रुप से दांत पर लगाने से दर्द में आराम मिलता हैI

-यदि अपामार्ग की  ताज़ी जड़ का प्रयोग दातून के रूप में कराया जाय तो दांतों क़ी चमक बरकार रहेगी और दाँतों क़ी विभिन्न समस्याओं जैसे दाँतों का हिलना,मसूड़ों क़ी दुर्गन्ध एवं दाँतों के हिलने जैसे स्थितियों में लाभ मिलता है I

-अपामार्ग क़ी जड़ को साफ़ से धो कर इसका रस निकालकर बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर आग में पकाकर ,तेल शेष रहने पर छानकर किसी शीशी या बोतल में भरकर रख लें,हो गया ईयर ड्राप तैयार ,अब इसे दो-दो बूँद कानों में डालने से कान के विभिन्न रोगों में लाभ मिलता है I

-अपामार्ग क़ी जड़ को बलगमयुक्त खांसी और दमे जैसी स्थितियों में चमत्कारिक रूप से प्रभावी पाया गया है I

-अपामार्ग क़ी क्षार क़ी 500 मिलीग्राम क़ी मात्रा में लेकर इसमें शहद मिलाकर सुबह शाम चाटने मात्र से कफ़उत्क्लेषित    होकर बाहर आ जाता है, यह योग बच्चों में विशेष रूप से फायदेमंद होता है I

-यदि आप बार- बार आनेवाली खांसी से परेशान हों या कफ़ बाहर निकलने में परेशानी हो रही हो तो कफ़ गाढा निकल रहा हो तो अपामार्ग के क्षार को 250 मिलीग्राम एव 250 मिलीग्राम मिश्री के साथ मिलाकर गुनगुने पानी से देने से काफी लाभ मिलता है।

 

 

 

 

 

 

-यदि रोगी सांस (दमे ) के कारण सांस लेने में कठिनाई महसूस कर  रहा हो तो अपामार्ग क़ी जड़ का पाउडर पांच ग्राम, ढाई ग्राम काली मिर्च के पाउडर के साथ प्रातः सायं लेने से लाभ मिलता हैI

-अपामार्ग के बीजों को पीस लें और प्राप्त चूर्ण को 2.5 ग्राम क़ी मात्रा में सुबह-शाम चावल को धोने के बाद शेष बचे पानी के साथ प्रातः सायं देने से खूनी बबासीर (ब्लीडिंग पाइल्स ) में लाभ मिलता है I

-अपामार्ग क़ी पत्तियों को 5  क़ी संख्या में लेकर इसे काली मिर्च के पांच टुकड़ों के साथ पानी में पीसकर सुबह-शाम लेने से पाइल्स (अर्श ) में लाभ मिलता है और इस कारण निकलने वाला खून भी बंद हो जाता है I

-यदि रोगी पेट के दर्द से परेशान हो तो अपामार्ग की पंचांग को दस से पंद्रह ग्राम की मात्रा में लेकर इसे आधा लीटर पानी में पकाने के बाद चार भाग शेष रहे तो इसमें 250 मिलीग्राम नौसादर का पाउडर और लगभग 2.5 ग्राम काली मिर्च पाउडर मिलाकर दिन में दो बार सात से दस दिन तक लगातार देने से लाभ मिलता है I

-यदि आप भूख न लगने जैसी समस्या से परेशान हों तो घबराएं नहीं बस अपामार्ग की पंचांग (जड़,तने,पत्ती,फूल एवं फल ) का क्वाथ बनाकर इसे बीस से पच्चीस मिली की मात्रा में खाली पेट सेवन करें तो इससे पाचक रसों की वृद्धि होकर भूख लगने लगती है तथा हायपरएसिडिटी में भी लाभ मिलता है I

-स्त्रियों में अनियमित  मासिक चक्र ,अधिक रक्तस्राव आदि कारणों से गर्भ धारण में हो रही समस्या में भी अपामार्ग अत्यंत ही लाभकारी औषधि के रूप में जानी जाती है ..बस इसके बीजों के पाउडर को पांच से दस ग्राम की मात्रा में या इसकी जड़ को साफकर सुखाकर बनाए गए पाउडर को पांच से दस ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ पिलाने से लाभ मिलता है !

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

-अपामार्ग,वासा ,पाठा ,कनेर इनमें से किसी एक औषधि की जड़ को स्त्री की नाभि,मूत्र प्रदेश या योनि के आसपास लेपन करने मात्र से सुख-प्रसव होना विदित है …!

-अपामार्ग की जड़ को पीसकर योनि के आसपास रुई में मिलाकर योनि में रखने मात्र से योनिशूल और मासिक धर्म की रुकावर दूर होती है I

-जोड़ों की सूजन में इसके ताजे पत्तों को पीसकर लेप करने मात्र से सूजन घटने लग जाती है ।

-अपामार्ग की ताज़ी पत्तियों को आठ से दस की संख्या में लेकर काली मिर्च के पांच से आठ टुकड़े एवं तीन से पांच ग्राम लह्शुन के साथ एक साथ पीसकर गोली बनाकर ..एक गोली बुखार आने से पूर्व सेवन करने पर यह ज्वर मुक्त करने में मदद करता है । -हल्दी के साथ अपामार्ग की जड़ का प्रयोग बराबर मात्रा में नियमित रूप से करने पर एंटीवाइरल प्रभाव प्राप्त होता है ..।

सीखरी, लटजीरा
सीखरी, लटजीरा

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